विषय: शिक्षक का महत्व
दिनांक: 05 सितम्बर 2012
स्थल: AISSMS Polytechnic College
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काको लागूं पायं।
बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो बताय।।
अर्थ : गुरु और गोविन्द (परमेश्वर) सामने खड़े होते हैं तो पहले वंदन किस्से करें? गुरु गोविन्द कहते हैं की, "इश्वर भक्ति का मार्ग दिखता हैं, पर गुरु जीवन का न्यास, ज्ञान के रूप में देता हैं । इसलिए गुरु हैं श्रेष्ट हैं और में पहले उससे ही वंदन करूँगा ।"
स्वामी विवेकानंदा, जिन्हें ज्ञान का सागर मन जाता हैं, वे भी अपने ज्ञान के स्तोत्र और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना का श्रेया अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस को देते हैं । शिवाजी महाराज के गुरु दादाजी कोंडदेव चन्द्रगुप्त मौर्या के गुरु चाणक्य, ऐसे सर्वोतम शिष्यों ने गुरु के मार्ग दिखने पर इतिहास रचा हैं । ऐसे कहा जाता हैं की माँ-बाप के बाद, गुरु ह हमें जीवन का सार सिखाते हैं । डॉ . सर्वपल्ली राधाकृष्ण, जो की भारत के राष्ट्रपति थे , उन्होंने अपने जीवन भर शिक्षकों के अधिकारीयों के लिए संघर्ष किया । इसलिए उनके जन्मदिन, 5 सितम्बर 1888 को 'शिक्षक दिन'माया जाता हैं ।
जैसे एक कुम्भर गीली मीट्ठी को मटके का आकर देते हैं, ही हमारे जीवन में अनेक गुरु हमारे विचारों को आकार देते हैं । हर शिक्षक अपने जीवन के एक में विद्यार्थी रह चूका होता हैं, इस्ला वहा विद्यार्थियों की अवस्था आची तरह समज सकता हैं । हर शिक्षक कोशिश करता हैं की वहा अपने विद्यार्थियों को उन समस्यायों से दूर रखे जो उन्हें अपने विद्यार्थी जीवन में उठाने पड़ी थी । गुरु तभी आनंदित होते हैं जब वहा अपने शिष्यों को सफलता की सीढियों पर चढते देखते हैं । ऐसे शिक्षकों को मेरा शत शत नमन । जय हिंद ।
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